मिस्टर सक्सेना नीचे बैठ गया और उसने अविका के बालों को अपनी मुट्ठी में भरकर गुस्से में कहा" अब कोई भी ऐसी वैसी हरकत मत करना। लड़की पिछले कई महीनो से मैं तुम्हारे पति के कैद में था। उसने बहुत टॉर्चर किया मुझे, जितना उसने मुझे टॉर्चर किया है अब उससे कई ज्यादा मैं तुझे हर रात टॉर्चर करूंगा। तब जाकर मेरा बदला पूरा होगा।
मिस्टर सक्सेना ने अविका के बालों को बहुत कस के पकड़ा था। जिस वजह से अविका को दर्द हो रहा था। और उसके आंखों से आंसू बह रहे थे। उसके फेस पर थप्पड़ों के भी निशान थे। मिस्टर सक्सेना उठकर खड़ा हो गया। लेकिन उसने अविका के बालों को नहीं छोड़ा था। और वह अविका को घसीटते हुए अपने गाड़ी की तरफ ले जाने लगे। जिससे अविका के पैर छिलने की वजह से खून निकलने लगा।
अविका दर्द से तड़प रही थी। लेकिन उसे बेरहम इंसान को अविका पर जरा भी तरस नहीं आ रहा था। वह घसीटते हुए अविका को अपनी गाड़ी की तरफ ले जा रहा था।
अविका दर्द से कराह रही थी। लेकिन मिस्टर सक्सेना ने उसे पर जरा भी रहम नहीं दिखाया। वह वैसे ही अविका को घसीटते हुए अपनी गाड़ी की तरफ लेकर जा रहा था।
अविका रोते हुए उसे बेरहम इंसान को देखा। और फिर एक जोरदार मिस्टर सक्सेना को धक्का दिया। जिससे मिस्टर सक्सेना खुद को संभाल नहीं पाया। और जाकर एक पत्थर पर गिर गया। जिस वजह से उसके सर में चोट लग गया
अविका ने एक नजर उन सबको देखा। और जल्दी से वहां से भागने लगी। तो एक आदमी ने अविका को पकड़ना चाहा, जिस वजह से अविका के ब्लाउज उसके कंधे से फट गया। अविका ने एक नजर अपने कंधे की तरफ देखा। और फिर उसे आदमी को धक्का दिया। और वहां से भाग गई,
अविका को भागते हुए देखकर मिस्टर सक्सेना के सारे आदमी अविका के पीछे भाग गए, मिस्टर सक्सेना नीचे से उठे और फिर अपने पॉकेट से रुमाल निकाल कर अपने माथे पर लगा लिया। जहां से खून निकल रहा था।
मिस्टर सक्सेना ने सामने की तरफ देखते हुए कहा" हमने भी देखता हूं लड़की आज तुम मुझसे कैसे बचती हो। अविका सड़क पर तोड़ रही थी। उसके पैर में छाले पड़ गए थे अविका एक पल रुके और हाफ ते हुए पीछे की तरफ देखा। जहां से बहुत सारे लोग उसके पीछे ही आ रहे थे। यह देखकर अविका सामने जंगल की तरफ भाग गई और एक पेड़ के पीछे जाकर छुप गई।
वहीं दूसरी तरफ वीरांश अपनी गाड़ी को सड़क पर दौड़ा रहा था। इस वक्त वह बहुत गुस्से में था और गुस्से में उसका चेहरा पूरी तरह से लाल था।
तभी एक झटके से वीरांश ने अपनी गाड़ी को भी सड़क पर रोक दिया। और गाड़ी से बाहर आ गया और वह नीचे बैठ गया। उसके सामने एक टूटा हुआ सेंडल रखा हुआ था। वीरांश ने हाथ बढ़ाकर उस सैंडल को उठाया।
वीरांश ने उस टूटे हुए सैंडल को देखकर गुस्से में कहा" अगर आज तुमने मेरी अविका के साथ कुछ भी किया। तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा। आज तुम्हारी जिंदगी का आखिरी दिन है मिस्टर सक्सेना एक बार मैं तुम्हें ढूंढ लूं, फिर मैं तुम्हें बताऊंगा विरांश कितना खतरनाक है।
वीरांश अपनी जगह से उठा और गाड़ी में बैठकर वहां से आगे चला गया। थोड़ी दूर जाने पर वीरांश का फोन रिंग करने लगा। उसने एक झटके से अपनी गाड़ी को रोका। और फिर फोन रिसीव करके अपने कान पर लगा लिया। दूसरी तरफ से कुछ ऐसा कहा गया जिससे वीरांश के फेस पर खतरनाक स्माइल आ गई, फिर उसने कॉल कट कर दिया।
वीरांश अपनी गाड़ी से बाहर निकला और उसने अपनी नज़रें चारों तरफ तोड़ते हुए कहा" हो तो तुम किसी ठिकाने पर नहीं गए हो, बल्कि यहीं कहीं आसपास हो अगर तुम यहां आस-पास हो। तो मेरी अविका भी नहीं आसपास ही होगी और मुझे उसे ढूंढना है।
वह अविका एक पेड़ के पीछे छुपकर बैठी थी। उसने अपने दोनों हाथों को खुद को पूरी तरह से ढक रखा था। इस वक्त वह बहुत घबराई हुई थी। उसके चेहरे पर आंसू भरे हुए थे। और फेस पर थप्पड़ के निशान जो अब सूज गए थे।
अविका ने अपने आंसू को साफ करते हुए कहा" वीर प्लीज कहां हो तुम आ जाओ मुझे बचाने के लिए...
तभी झाड़ियां से अविका को कुछ दिखाई दिया। जिससे उसके फेस पर चमक आ गई। सड़क के पास कोई खड़ा था। यह कोई और नहीं बल्कि वीरांश था इसलिए वह झाड़ियां से बाहर निकल कर सड़क के तरफ भागते हुए वीरांश के पास जाने लगी।
अविका इससे पहले कि वीरांश के पास पहुंचती, तभी किसी ने अविका के मुंह पर हाथ रखा और उसे वहां से एक झटके में लेकर दूसरी तरफ भाग गया।
वीरांश अपनी पीठ अविका की तरफ करके खड़ा था। जिससे उसे ऐसा लगा कि अविका उसके आसपास है। उसने छट से पीछे पलट कर देखा। पर उसके सामने वहां पर कोई भी नहीं था। क्योंकि उसके पलटने से पहले ही मिस्टर सक्सेना के आदमियों ने अविका को एक बार फिर से पकड़ लिया था।
वीरांश ने इधर-उधर देखते हुए कहा" मुझे ऐसा क्यों लगा जैसे अविका मेरे आस-पास ही थी।
तभी वीरांश का फोन रिंग करने लगा। उसने कॉल उठाया तो दूसरी तरफ से बॉडीगार्ड ने कहा" सर मिस्टर सक्सेना की कार हाईवे की तरफ है।
विरांश ने बिना कुछ कहे कॉल कट किया। और गाड़ी में बैठकर वहां से आगे चला गया।
मल्होत्रा मेंशन...
कियारा की गाड़ी मल्होत्रा मेंशन में आकर रुकी, और वह गाड़ी से निकलकर अंदर की तरफ दौड़ते हुए चली गई। सभी लोग हाल में ही बैठे थे।
कियारा को इस तरह घबराते और परेशान देखकर रजत जी ने कहा" क्या बेटा तुम रात के इस वक्त कहां से आ रही हो।
कियारा रजत जी की तरफ देखा। और फिर रोते हुए रजत जी के गले लग गई, कियारा ने रोते हुए कहां" पापा वह भाभी को किसी ने किडनैप कर लिया है।
कियारा की बात सुनकर सभी लोग परेशान हो गए, राहुल भी हैरानी से खड़ा था। उसने जल्दी से अपना फोन निकाला और वहां से दूसरी तरफ चला गया। उसने फोन निकाल कर वीरांश को लगाया।
जब वीरांश ने कॉल रिसीव किया। तो राहुल ने परेशान होते हुए कहा" वीराना तू कहां है मैं अभी आ रहा हूं तेरे पास...
दूसरी तरफ से वीरांश ने गाड़ी ड्राइव करते हुए कहा" इसकी कोई जरूरत नहीं है मैंने पता कर लिया है। वह कहां छुप कर बैठा है... And don't worry...मैं अविका को कुछ नहीं होने दूंगा। इतना कहकर वीरांश ने कॉल कट कर दिया।
वहीं दूसरी तरफ मिस्टर सक्सेना अविका को घसीटते हुए पहाड़ी के पास लेकर आ गया था। अविका डरी सहमी सी मिस्टर सक्सेना के सामने बैठी हुई थी। वह धीरे से उठकर खड़ी हुई, और उसने अपने हाथ जोड़ते हुए कहा" प्लीज मुझे यहां से जाने दो। मैं तुम्हारे बारे में किसी को कुछ नहीं बताऊंगी।
मिस्टर सक्सेना ने जोर से शैतानों की तरह हंसते हुए कहा" तुम यहां से बचकर निकल पाओगी तब तो किसी को कुछ बताओगी।
मिस्टर सक्सेना ने अविका को नीचे से ऊपर तक अजीब नजरों से घूरते हुए कहा" पहले मैं तुम्हारे इस खूबसूरत शरीर को जी भर के नोचूंगा। फिर तुम्हें हमेशा के लिए चैन की नींद सुला दूंगा। उस वीरांश मल्होत्रा को भी तो पता चले उसने किसी से पंगा लिया था।
अविका मिस्टर सक्सेना की तरफ देखा। जो शैतानों की तरह जोर-जोर से हंस रहा था। फिर अविका ने पीछे मुड़कर देखा। जहां एक गहरी खाई थी यह देखकर अविका डरने लगी उसने अपनी आंखें कस के बंद की और फिर अपने मन में कुछ सोचते हुए कहा" वीर अगर आज तुम मुझे टाइम पर बचाने नहीं आए, तो तुम हमेशा के लिए मुझे खुद दोगे यह इंसान मुझे हाथ लगाए, उससे पहले मैं यहां से कूद कर अपनी जान दे दूंगी।
अविका ने गहरी सांस ली। और फिर अपनी आंखें खोलकर सामने खड़े हैवान को देखने लगी। मिस्टर सक्सेना छोटे-छोटे कदम लेते हुए अविका की तरफ बढ़ने लगा। यह देखकर अविका पीछे की तरफ अपने कदम लेने लगी।
शायद मेरी मौत ऐसे ही लिखी हो। मैं अपने साथ इतना बुरा होने नहीं दे सकती। इससे तो अच्छा है कि मैं मौत को गले लगा लूं, अविका ने अपने मन में सोचते हुए कहा" और अगले ही पलट वो नीचे कूद गई।
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क्या लगता है क्या अविका बच पाएगी या फिर वह हमेशा के लिए वीरांश से दूर हो जाएगी। प्लीज पढ़कर कमेंट में जरूर बताइएगा। और अब तक आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी यह भी प्लीज बताइएगा।
Syco Girl
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