उलझे जज़्बात दिल के महीन धागों में,
ज़ुबां हिली, पर कह न सकी ख़्वाबों को।
रंगी़न ख़्वाब अगर बोल जाते हसीन दास्तां,
तो सवालों में क़ैद हो जाते वो अफ़साने।
जब कह न सकी, तो क़लम उठा लिया मैंने,
दिल की हिचकियों में बंधी ख़्वाहिशों को,
लिखती हूं मैं… जो अब सिर्फ़ Hitch है।
✍️ Hitch