on my profile soon this novel मंडप सजा था, शहनाइयाँ गूँज रही थी फेरे शुरू पहले दुल्हन शादी छोड़कर चली गई , मेहमानों की भीड़ में सन्नाटा छा गया लड़के वालों का गुस्सा आसमान छूने लगा—इज़्ज़त का सवाल था, समाज क्या कहेगा? चाचा की बेटी पचुपचाप कोने में खड़ी सब देख रही थी। हीरो के पापा ने चाचा से कहा, “भाई साहब, शादी रुकनी नहीं चाहिए। आप की बेटी को दुल्हन बना दो। बस यही एक रास्ता है।” चाचा ने साफ़ मना कर दिया। “मैं अपनी बेटी की ज़िन्दगी इज़्ज़त के नाम पर बर्बाद नहीं करूँगा। मेरी बेटी की शादी उसकी मर्ज़ी ओर पसंद से से होगी, जबरदस्ती नहीं।” Priyanka Bagani more updates follow me....