"ये कोई महंगे बाज़ार से खरीदा हुआ गुलदस्ता नहीं है, ये तो सड़क के किनारे मुस्कुराते हुए उन 'जंगली फूलों' की कहानी है, जिन्होंने मेरी भागदौड़ भरी लाइफ में सुकून के रंग भर दिए। इस फोटो के पीछे छिपी है एक अनकही याद... जिसे मैंने अपनी खिड़की पर सजाया था।" पढ़िए मेरी book"स्याही और जज्बात"
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PATI BRAHMACHARI 🩶
"ओह हो! फिर वही दीवार और आपका मौन व्रत? 🙄 अरे रूद्र जी, कम से कम सिमरन समझ के एक बार पलट तो देख लीजिए! 💃
कहते हैं आप बड़े तपस्वी हैं, पर मेरी पायल बजते ही आपकी उंगलियां माला पर क्यों रुक जाती हैं? डरते हैं न आप! 😜 कि कहीं मेरी बातों की खनक आपकी बरसों की मेहनत न मिट्टी कर दे।
ठीक है, आप अपनी समाधि संभालिए और मैं अपनी ज़िद! मैं इग्नोर होने वाली चीज़ नहीं हूँ। अब 90s के गाने भी बजेंगे और मेरा शोर भी होगा। अपनी माला कस के पकड़ लीजिए महाराज, क्योंकि आपकी शांति भंग करने यह 'झल्ली' आ गई है! संभल सको तो संभल लो! 🎶✨"
अन्वेषा- "छोड़िए मुझे! आपकी छुअन मुझे ज़हर जैसी लगती है।"❤️🔥
अभिमान- (उसकी आँखों में सीधे देखते हुए) "ज़हर? तो फिर तुम्हारी नब्ज़ इतनी तेज़ क्यों चल रही है, अन्वेषा? यह नफ़रत की आग है या उस जुनून का डर, जो तुम खुद से छिपा रही हो?"🔥
पढ़िए SAFAR-E-DIL-जब नफ़रत जुनून में बदल जाए ❤️🔥✨️
🔥 ज़िद, जुनून और जंग... आगाज़! 🔥
"एक खूँखार माफिया की ज़िद, एक मासूम की बेबसी और बीच में खड़े तीन मासूम बच्चे। दिल्ली के इस अंधेरे में या तो अनिका का वजूद मिट जाएगा, या निशांत का पत्थर दिल पिघल जाएगा।"
विक्रांत की नफ़रत और निशांत का पागलपन... इस कहानी को उस मोड़ पर ले जाएगा जहाँ सिर्फ़ ख़ून नहीं बहेगा, बल्कि जज़्बात जलेंगे।
क्या आप तैयार हैं निशांत कामार्थ की इस खौफ़नाक 'ज़िद' का गवाह बनने के लिए?
पढ़िए मेरे novel MAFIA KI ZID ❤️🔥✨️